कृषि

सालों बाद भारतीय किसान काट रहे चांदी, केंद्र सरकार भी मौज में, जानें वजह

Mukesh Gusaiana
1 May 2022 1:13 AM GMT
सालों बाद भारतीय किसान काट रहे चांदी, केंद्र सरकार भी मौज में, जानें वजह
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दशकों बाद ऐसा हो रहा क‍ि देश का गेहूं का किसान बंपर मुनाफा कमा रहा। दूसरी ओर सरकार भी फायदे में है। इसकी मुख्‍य वजह रूस और यूक्रेन के बीच हो रही लड़ाई।

लखनऊ : गेहूं किसान खुश हैं। सरकार भी खुश है। किसान बता रहे हैं क‍ि दशकों बाद उन्हें सरकारी कीमत यानी न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP एमएसपी) से ज्‍यादा कीमत मिल रही है। यही कारण है क‍ि देश के ज्‍यादातर बड़े उत्‍पादक राज्‍यों में सरकारी मंडियों में गेहूं की खरीद की रफ्तार बहुत कम है। एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा क‍ि इस सत्र में सरकार की गेहूं खरीद पिछले 10 साल में सबसे कम रह सकती है।

फिर भी किसानों को फायदा हो रहा। एमएसपी (MSP) यानी मिनिमम सपोर्ट प्राइस या फिर न्यूनतम सर्मथन मूल्य होता है। एमएसपी सरकार की तरफ से किसानों की अनाज वाली कुछ फसलों के दाम की गारंटी होती है। इसके तहत हुई खरीदी को सरकार राशन सिस्टम (PDS) के तहत जरूरतमंद लोगों को अनाज देती है।

किसानों को एमएसपी से ज्‍यादा मिल रही कीमत

उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश, गेहूं उत्‍पादन के मामले में दूसरे राज्‍यों से सबसे आगे हैं। इन दोनों राज्‍यों में ज्‍यादातर किसान सरकारी मंडी की बजाय बाहर व्‍यापारियों को उपज बेच रहे हैं। वजह है क‍ि उन्‍हें वे अच्‍छी कीमत दे रहे हैं। भारत में गेहूं का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) 2,015 रुपए प्रति क्‍विंटल है।

मध्‍य प्रदेश के जिला धार के लोहारी बुजुर्ग गांव के किसान बनेसिंह चौहान बताते हैं, 'इस बार अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए व्यापारी किसानों के घर भी पहुंच रहे हैं। वे 2,200 रुपये से लेकर 2,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर शरबती किस्म का गेहूं खरीद कर किसानों को तुरंत भुगतान भी कर रहे हैं।' चौहान ने कहा कि उन्होंने किसानों से गेहूं खरीदने को लेकर व्यापारियों के बीच ऐसी होड़ पहले कभी नहीं देखी।

कीमत एमएसपी से ज्‍यादा कैसे?

दुनियाभर में गेहूं का निर्यात लगभग 200 मिल‍ियन टन होता है जिसमें रूस और उक्रेन का शेयर 50-50 मिलियन मीट्रिक टन है। वार की वजह से दोनों देशों की निर्यात लाइने बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। ऐसे में भारतीय गेहूं के किसान के लिए अवसर के नए दरवाजे खुल गए हैं। भारतीय मंडियों में गेहूं की कीमत बढ़ गई जो अगले तीन से चार महीने तक ऐसी ही रह सकती है।

मंडियों में खरीद की स्‍थित‍ि क्‍या है?

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 25 अप्रैल तक मध्य प्रदेश में एफसीआई और राज्य एजेंसियों द्वारा 25.8 लाख टन की गेहूं खरीद का अनुमान लगाया गया था, जो पिछले साल की इसी अवधि के दौरान खरीदे गए 48.6 लाख टन से लगभग 47% कम है।

इसी तरह, गुजरात में पिछले साल के 45,289 टन की तुलना में अब तक केवल छह टन गेहूं की खरीद हुई है, जबकि राजस्थान में खरीद घटकर 737 टन रह गई है, जबकि पिछले साल यह खरीद 4.86 लाख टन थी।

उत्तर प्रदेश में सरकारी एजेंसियों द्वारा बमुश्किल 77,707 टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल यह 6.16 लाख टन था। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि यूपी में सरकारी खरीद बड़े अंतर से पीछे छूट सकती है। यूपी में कुल खरीद लक्ष्य 60 लाख टन है। पंजाब में भी निजी कंपनियों ने लगभग 4.6 लाख टन गेहूं की खरीद की है, जो दर्शाता है कि निजी व्यापारियों द्वारा भारी खरीद की जा रही है।

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