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Castor Farming: कम वक्त और कम लागत में कई गुना ज्यादा मुनाफा, किसान ऐसे करें अरंडी की खेती

Sandeep Beni
17 Aug 2022 8:53 AM GMT
Castor farming: अरंडी एक व्यवसायिक फसल है. इसकी खेती के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ती है. इसे किसी भी तरह की मिट्टी या किसी भी तरह की जलवायु में लगाया जा सकता है. पीएच 6 मान की भूमि इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. बता दें कि इसके बीजों का इस्तेमाल तेल बनाने में इ्स्तेमाल किया जाता है.

Castor farming: देश में किसानों के बीच औषधीय पौधों की खेती काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा. एरोमा मिशन के तहत किसानों के बीच सरकार द्वारा इसकी खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसका परिणाम ये भी हुआ है कि इन फसलों का रकबा भी बढ़ा है. अरंडी भी ऐसे ही फसलों में शामिल है, जिसकी खेती कर किसान बढ़िया मुनाफा हासिल कर सकता है.

इन जगहों पर करें अरंडी की खेती

अरंडी एक व्यवसायिक फसल है. इसकी खेती के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ती है. इसे लेमनग्रास की ही तरह किसी भी तरह की मिट्टी या किसी भी तरह की जलवायु में लगाया जा सकता है. पीएच 6 मान की भूमि इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. हालांकि, जिस भी खेत में किसान इस फसल की खेती कर रहे हो, उसमें जलनिकासी की व्यवस्था काफी बेहतर होनी चाहिए. सामान्य के साथ-साथ आर्द्र और शुष्क तापमान में इसके पौधे के विकास पर कोई असर नहीं पड़ता है. इसकी खेती करना अन्य पारंपरिक फसलों के मुकाबले बेहद सस्ता है. विशेषज्ञों के अनुसार 25 से 30 हजार रुपये में एक हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जा सकती है.

कहां इस्तेमाल होता है इसका तेल

बता दें कि इसके बीजों का इस्तेमाल तेल बनाने में इ्स्तेमाल किया जाता है. इससे कपड़े की डाई और साबुन, औषधीय तेल और बच्चों को मालिश करने वाले तेलों के प्रोडक्ट को तैयार करने में उपयोग किया जाता है. अरंडी के तेलों पर किसान अच्छी कीमत इसलिए भी हासिल कर सकता है क्योंकि इसे स्टोर करना काफी आसान है. शून्य तापमान में ये तेल जमता नहीं है.

रोपाई से लेकर कटाई तक

अरंडी की खेती किसान दो माध्यमों से कर सकते हैं. किसान नर्सरी में पौधे तैयार करने के बाद इसकी रोपाई खेतों में कर सकते हैं. इसके अलावा बीजों को सीड ड्रिल के माध्यम से खेतों में लगा सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हेक्टेयर खेत में अरंडी उगाने के लिये करीब 20 किलोग्राम बीजों की जरूरत पड़ती है. इसकी रोपाई करने से पहले किसान खेतों की दो-तीन जुताई अच्छे से कर लें. इस दौरान खेतों में खरपतावर ना जमने दें. रोपाई के 120 से 130 दिनों में ही यह फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है.

लागत से कई गुना ज्यादा मुनाफा

इसके तेलों का निर्यात विदेशों में भी होता है. बाजार में औसतन 5400 से 7300 रुपये प्रति क्विटल तक के भाव पर किसानों से इसके तेल की खरीद की जाती है. अगर किसान एक हेक्टेयर में 25 क्विंटल तक तेल का उत्पादन करता है तो भी आराम से 1 लाख 25 हजार रुपये तक का मुनाफा हासिल कर सकता है.

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