कृषि

किसानों की हुई बल्ले बल्ले! समर्थन मूल्‍य से मिल रहे ज्‍यादा भाव

Mukesh Gusaiana
13 April 2022 1:10 PM GMT
किसानों की हुई बल्ले बल्ले! समर्थन मूल्‍य से मिल रहे ज्‍यादा भाव
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किसानों की हुई बल्ले बल्ले! फसलों ने किया किसानों को मालामाल, समर्थन मूल्‍य से मिल रहे ज्‍यादा रेट

खरीफ के बाद रबी सीजन में भी फसलों के बंपर भाव मिलने से किसानों की बल्ले-बल्ले रही है। खरीफ की फसल कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5726 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि पूरे सीजन कपास समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव में बिकी। फिलहाल अच्छी क्वालिटी की कपास 11900 रुपये प्रति क्विंटल तक भी बिक रही है। वहीं बासमती धान 1121, 1718 और 1121 भी 4300 रुपये से ज्यादा के भाव बिक रही है।

वहीं गेहूं की फसल भी काफी सालों बाद समर्थन मूल्य से ज्यादा बिकी। पिछले साल का पुराना गेहूं 2100 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। जबकि समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। मंडियों में नए गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है।

वहीं दूसरी तरफ किसान प्राइवेट खरीदारों को गेहूं को इसलिए गेहूं नहीं बेच रहे, उन्हें उम्मीद है कि इस बार सरकार गेहूं पर बोनस दे सकती है। अगर वे प्राइवेट खरीदार को समर्थन मूल्य से 50 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा भाव बेच देंगे और सरकार ज्यादा बोनस दे दिया, तो उन्हें नुकसान हो जाएगा। हालांकि समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव पर काफी किसानों ने प्राइवेट खरीद पर गेहूं बेचा भी है।

इस साल सामान्य से ज्यादा तापमान की वजह से गेहूं की पैदावार कम है। जिससे किसान गेहूं का भाव बढ़ने की उम्मीद में स्टाक भी कर रहे हैं। जिस वजह से इस सीजन मंडियों में आवक कम रह सकती है।

सरसों ने लगातार दूसरे साल किया मालामाल

कम सिंचाई लागत वाली सरसों की फसल मार्केट में 6500 से 6600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। जबकि समर्थन मूल्य 5050 रुपये है। पिछले साल भी सरसों समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव बिकी थी। एक बार तो सरसों के भाव आठ हजार रुपये के पार चले गए थे।

विशेषज्ञ उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार सरसों का भाव सात हजार रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर जा सकता है। प्रति हेक्टेयर सरसों का 20 से 30 क्विंटल उत्पादन होता है। गेहूं की तुलना में कम खर्च में सरसों की फसल तैयार होती है और मुनाफा भी डेढ़ से दो गुना तक रहता है। जिससे रबी सीजन में इस बार सरसों का रकबा और बढ़ सकता है।
धान की फसल की ओर रूझान बढ़ेगा

अच्छे भाव मिलने की वजह से इस बार क्षेत्र में किसानों का रूझान धान की फसल की तरफ बढ़ सकता है। हालांकि सरकार का प्रयास सिंचाई योग्य कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में धान की बजाय कपास, मूंग, मक्का जैसी कम पानी लागत वाली फसलों की बिजाई कराने का है।

इसके लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। कपास के भाव ज्यादा मिले हैं, लेकिन पिछले साल गुलाबी सुंडी ने जो कहर ढाया, उससे किसान इस बार कपास की फसल की बिजाई करने से पीछे हट रहे हैं।

हालांकि कृषि विभाग गुलाबी सुंडी की समय रहते रोकथाम के लिए लगा हुआ है, ताकि कपास का रकबा ना घटे। इसके लिए पिछले साल के खेत में पड़े कपास की फसल के अवशेष को उठवाया जा रहा है, वहीं काटन मिल में जाकर बिनौले और कपास को ढक कर रखने के आदेश दिए जा रहे हैं।



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