कृषि

किसानों की हुई मौज; खुले बाजार में फसलों के मिल रहे बंपर भाव, जानें कैसे?

Mukesh Gusaiana
18 April 2022 4:03 PM GMT
किसानों की हुई मौज; खुले बाजार में फसलों के मिल रहे बंपर भाव, जानें कैसे?
x
हरियाणा में ओपन मार्केट में फसल की कीमत एमएसपी से ज्यादा मिल रही है।

हरियाणा में ओपन मार्केट में फसल की कीमत एमएसपी से ज्यादा मिल रही है। एमएसपी की तुलना में गेहूं पर 200-300 रुपये क्विंटल सरसों पर 1200 से 2000 और कपास पर पांच हजार से साढ़े छह हजार रुपये तक ज्यादा कीमतें मिल रही हैं।

चंडीगढ़। कृषि कानूनों में सुधारों पर राजनीति और एक साल चले किसान आंदोलन के चलते भले ही केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून रद करने पड़े, लेकिन हरियाणा के किसानों को इन कानूनों की अहमियत अब अच्छे से समझ आ रही है।

दक्षिण हरियाणा के किसान गेहूं, सरसों व अन्य फसलों को अनाज मंडियों में लाने के बजाय खुले बाजार में बेचकर अच्छे दाम वसूल रहे हैं। स्थिति यह है कि सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, हिसार, रोहतक, चरखी दादरी, झज्जर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ सहित अन्य जिलों में सरकारी एजेंसियां अभी तक मंडियों में खरीद में तेजी आने का इंतजार रही हैं, जबकि व्यापारी-आढ़ती खेतों से ही फसलों काे उठा ले रहे हैं। इसे अच्छे संकेत मान प्रदेश सरकार भी किसानों को खुद के समूह बनाकर उन्हें निर्यातक बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

मंडियों का गेहूं की खरीद 2015 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रही है, जबकि व्यापारी ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल ज्‍यादा की दर पर गेहूं खरीद रहे हैं। गेहूं की फसल का भूसा (तूड़ी) भी रिकार्ड 20 हजार रुपये एकड़ बिक रही है।

सरसों की एमएसपी 5050 रुपये है तो खुले बाजार में किसानों को 6200 से लेकर 7000 रुपये तक भुगतान हो रहा है। सफेद सोना कही जानी वाली कपास 5,726 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले 10 से 12 हजार रुपये क्विंटल तक बिक रही है। इससे किसानों को खासा फायदा हो रहा है।

गेहूं की सरकारी खरीद की बात करें तो दक्षिण हरियाणा की तुलना में उत्तर हरियाणा विशेषकर जीटी रोड बेल्ट के अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत के साथ ही पंचकूला और यमुनानगर में गेहूं मंडियों में पहुंच रहा है। वीरवार तक करीब 24 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम है। गेहूं खरीद की रफ्तार को देखकर 85 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दूर बेहद मुश्किल दिख रहा है।

मानकों पर खरा नहीं उतर रहा गेहूं, केंद्र से मांगी मानकों में छूट

इस साल अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन अपेक्षाकृत कम हुआ है। गेहूं का दाना भी सिकुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम को साफ निर्देश दिए हुए हैं कि छह प्रतिशत से ज्यादा खराब गेहूं नहीं खरीदा जाए।

इसके उलट प्रदेश की विभिन्न मंडियों से खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा लिए गए सैंपल में गेहूं का दाना 8.75 प्रतिशत तक सिकुड़ा मिला है। मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहे गेहूं की खरीद के लिए प्रदेश सरकार केंद्र सरकार पर नियमों में छूट की मांग कर रही है, ताकि किसानों को नुकसान न हो। केंद्र सरकार की टीमें जल्द ही विभिन्न जिलों में जाकर रिपोर्ट तैयार करेंगी।

रद नहीं होते कृषि कानून तो और ज्यादा मिलते भाव

जून-2020 में केंद्र सरकार कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून, कृषक (सशक्तीकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून का अध्यादेश लाई थी जाे 27 सितंबर 2020 को राष्ट्रपति की मुहर के बाद लागू हो गए।

इसके बाद पंजाब से शुरू हुआ किसान आंदोलन हरियाणा में पहुंच गया जहां किसान नेताओं ने एक साल से अधिक समय तक कुंडली बार्डर और सिंघु बार्डर पर डेरा डालकर दिल्ली के रास्ते बंद रखे तथा विभिन्न टोल नाकों पर धरने दिए। इसके बाद पिछले साल 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी। प्रगतिशील किसान कहते हैं कि अगर यह कानून लागू रहते तो किसानों को फसलों का और ज्यादा भाव मिलता।

Next Story