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Wheat Rate Increase -गेहूं के दाम मे एकबार फिर बढोतरी, जानिए ताजा रेट

Sandeep Beni
6 Aug 2022 12:11 PM GMT
Wheat Rate Increase -गेहूं के दाम मे एकबार फिर बढोतरी, जानिए ताजा रेट
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गेहूं की ज्यादातर खरीद सरकार करती थी। इस बार सीजन में गेहूं की आवक मंडियों में कम रही।

रुस यूक्रेन युद्ध के बाद बजार भाव मे हलचल थी कि गेहूं के दाम इस बार बढ सकते है।होलशेल मार्केट में गेहूं के दाम मे भारी उछाल देखने को मिल रहा है। गेहूं दड़ा जो सबसे अधिक बिकता है और कनक का भाव पूछते ही, इसकी कीमत बताई जाती है वह इस समय 2420 रुपये क्विंटल हो गया है।कोरोना काल मे सबसे अधिक भाव था २४००/2400 रू था उसको भी पार कर चुका है।

व्यापारियों की माने तो गेहूं की कीमत और बढ़ेगी क्योंकि अब अगले वर्ष गेहूं की नई फसल आनी शुरू होनी है। अप्रैल में जब नया गेहूं आया था, तब इसका थोक बाजार में भाव 1,950 रुपये से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल था। निर्यात शुरू हुआ तो इसकी कीमत 2,175 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

निर्यात कंट्रोल करने संबंधी नियम लागू होते ही गेहूं अगले ही दिन गिरकर 2,025 रुपये क्विंटल हो गया। कुछ दिन कीमत स्थिर रही लेकिन कीमतें फिर बढ़ने लगीं और अब यह 2420 रुपये पर है।

अब जितना गेहूं का भण्डारण किया जाता है उतना पहले नही किया जाता है। इस समय गेहूं में स्टाकिस्ट सक्रीय है। समालखा में मंडी में दो लाख कट्टे गेहूं का स्टाक बताया जा रहा है।

गेहूं की ज्यादातर खरीद सरकार करती थी। इस बार सीजन में गेहूं की आवक मंडियों में कम रही। खरीद का टारगेट भी पूरा नहीं हो पाई। तेजी के चक्कर में किसानों के साथ-साथ स्टाकिस्ट सक्रीय रहे। रुस-यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं का निर्यात हुआ जिससे दाम बढ़े। बाद में निर्यात पर रोक लगी। तब भाव में गिरावट रही।

प्रवीण एसोसिएशन के प्रधान ने बताया कि गेहूं में और अधिक तेजी की संभावना है। जल्द ही भाव 2500 रुपये कि्वंटल क्रास कर सकता है। गेहूं के सीजन में भाव कम रहता है इस बार सीजन में समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव पर गेहूं बिका।

हरियाणा की पानीपत अनाज मंडी में इस बार गेहूं की आवक 4 लाख 72 हजार 621 क्विटंल रही। जबकि पिछले वर्ष सीजन के दौरान 7 लाख 23 हजार 662 क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी।

अर्थात आधा गेहूं मंडी में आया। उपसचिव मार्केट कमेटी पानीपत के अनिल मान के अनुसार भाव तेज होने के कारण मंडियों में गेहूं की आवक कम रही। स्टाकिस्ट सक्रीय रहे। इस बार दाना भी कमजोर था गेहूं की फसल भी कम हुई।

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