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नक्सल अटैक में पिता को खोया, मां ने पांच बच्चों के साथ संघर्षों से पाला, बेटी ने स्वर्ण जीत किया परिवार का सिर ऊंचा

Senti Gusaiana
10 Jun 2022 5:56 AM GMT
नक्सल अटैक में पिता को खोया, मां ने पांच बच्चों के साथ संघर्षों से पाला, बेटी ने स्वर्ण जीत किया परिवार का सिर ऊंचा
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झारखंड के छोटे से गांव से आने वाली इस लड़की ने न सिर्फ स्वर्ण पदक अपने नाम किया बल्कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स (Khelo India Youth Games) में रिकॉर्ड भी बनाया है.

खेलो इंडिया यूथ गेम्स (Khelo India Youth Games) में गुरुवार को 19 साल की सुप्रिती कचाप ने 3000 मीटर की रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम किया. उन्होंने नौ मिनट 46.14 सेकेंड में ये रेस अपने नाम की और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ का नेशनल यूथ रिकॉर्ड भी अपनी झोली में डाला. इससे पहले ये रिकॉर्ड 9 मिनट 50.54 सेकेंड का था. सुप्रिती की इस सफलता ने उनकी मां बालमति देवी को भावुक कर दिया और उन्हें वो दिन याद आ गया जब सुप्रिती के पिता को नक्सल अटैक में मारा दिय गया था. सुप्रिती की मां ने खेलों इंडिया यूथ गेम्स में अपनी बेटी के पदक जीतने के बाद अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, "सुप्रिती तो चल भी नहीं सकती थी जब इसके पिताजी को नक्सलियों ने मार दिया था. मुझे अपने बच्चों को पालने में इतने साल काफी संघर्ष करना पड़ा."

सुप्रिती को दौड़ना पसंद है और वह अपनी मां से यही बात कहती रहती थी कि अगर उसके पिता जिंदा होते तो उस पर गर्व करते. उनकी मां ने बताया, "उसे दौड़ना पसंद है और वह हमेशा मुझसे कहती रहती थी कि अगर उसके पिता जिंदा होते तो उसकी उपलब्धियों पर गर्व करते. हम जानते हैं कि वह उसे ऊपर से देख रहे हैं. जब वह घर लौटकर आएगी हम उसके पदक को हमारे गांव बुरहू में अपने घर पर रखेंगे."

पेड़ से बंधी मिली लाश

2003 दिसंबर में सुप्रिती के पिता रामसेवक ओरन को नक्सलियों ने मार दिया था. वह चिक्तिसक थे और गांव के चार लोगों के साथ पास के गांव में एक मरीज को देखने गए थे. लेकिन अगले दिन सभी मृत पाए गए और उनके शव पेड़ों से बंधे मिले, शरीर में गोलियां थीं. बालमति अपने पांच बच्चों के साथ अपने पति का इंतजार करतीं रह गईं. इसके बाद उन्हें अपने बच्चों को पालने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पति की मृत्यु के बाद बालमति को गुमला के घागरा ब्लॉक में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में नौकरी मिल गई और इसके बाद उनका परिवार सरकारी क्वार्टर में शिफ्ट हो गया.

2015 से बदली किस्मत

सुप्रिती को नुक्रडिप्पा चैनपुर स्कूल में भर्ती कराया गया जहां वे मिट्टी के ट्रैक पर दौड़ती थीं. इसके बाद उन्हें गुमला के सेंट पैट्रिक स्कूल में भर्ती कराया गया. यहां उनका दाखिला स्कॉलरशिप के दम पर हुआ. इंटर स्कूल कॉम्पटीशन में उन्हें कोच प्रभात रंजन तिवारी ने देखा और अपनी छत्रछाया में लिया. उन्होंने 2015 में झारखंड स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग देना शुरू किया. सुप्रिती के बारे में तिवारी ने कहा, "वह पहले 400 मीटर और 800 मीटर में दौड़ती थी लेकिन जब हम उन्होंने अपने यहां ट्रेनिंग देना शुरू किया और बार-बार लंबी दूरी के लिए उनके टेस्ट लिए तो पता चला कि उनकी दिल की धड़कन बढ़ती नहीं है. शुरुआत में मैंने उन्हें 1,500 मीटर में दौड़ाया इसके बाद उन्हें 3000 मीटर में आजमाया."

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