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गुसाईंयाना गावं फिर चर्चा में, सेंकडों साल पहले के साधू ने दिया अपनी समाधि का प्रमाण

Mukesh Gusaiana
6 Aug 2022 3:20 AM GMT
गुसाईंयाना गावं फिर चर्चा में, सेंकडों साल पहले के साधू ने दिया अपनी समाधि का प्रमाण
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सिरसा जिले के गावं गुसाईंना में पुराने कुँए के पास बने सेंकडों साल पुराने अखाड़े में बीते दिनों बारिश के कारण एक चमत्कार हुआ

सिरसा जिले के गावं गुसाईंना में पुराने कुँए के पास बने सेंकडों साल पुराने अखाड़े में बीते दिनों बारिश के कारण एक चमत्कार हुआ, चर्चा यह हैं की 30 से 40 फीट बने मिटटी के टीले में बारिश के कारण कुछ हिस्से की मिटटी खिसकी जिससे यहाँ किसी समय में किसी साधू ने समाधि ली हुई थी जो अब सेंकडो सालों बाद कंकाल के रूप में बाहर दिखाई देने लगी हैं.

ग्रामीणों से बातचीत में पता चला की काफी पुराने समय की बात हैं यहां एक बहुत ही क्रोधित स्वभाव के महाराज रहा करते थे जिन्होंने गावं पर आने वाली कोई बड़ी विपदा से बचाने के लिए जीवित समाधि ली थी, हालाँकि यह अभी स्पष्ट नही कहा जा सकता की वास्तव में उन्होंने जीवित समाधि ली थी.

कंकाल कितने साल पुराना हैं इसकी पुष्टि नही हुई हैं और ना ही पुरातत्व विभाग को इसकी कोई सुचना दी गयी हैं, लेकिन गावं के बुजुर्गो की माने तो यह कम से कम ३०० से अधिक साल पुराना साधू का कंकाल हैं. जिनका नाम प्रेमदास जी महाराज था और आज भी उनका कंकाल जो अब तक ज्यो की त्यों सुरक्षित पड़ा हुआ हैं, लोग देखने के लिए भी आने जाने लगे हैं.

तस्वीरों में आप देख सकते हैं की यहाँ एक मन्दिर भी बना हुआ हैं जो हाल ही में पिछले 7 साल पहले बनाया गया था, समाधि की फोटो देखे तो साधू का कंकाल बेठे हुए समाधि में हैं और जब इन्होने समाधि ली थी तब इनके सर पर एक घड़ा भी लगाया गया था.

गावं के कुछ बुजुर्ग लोगों का कहना हैं की यह कंकाल निकलना गावं में किसी बड़ी घटना का संकेत हो सकता हैं जबकि कुछेक का कहना हैं की साधू ने अस्तित्व में आने के लिए चमत्कार दिखाया हैं. वास्तव में यहां किसी ने, किसी समय में समाधि ली थी यह स्पस्ट करने के लिए यह चमत्कार हुआ हैं.

आज दिनांक 6 अगस्त को दोपहर के बाद फिर से साधू को सेंकडों साल बाद दोबारा मिटटी दी जाएगी.

आपको ये भी बता दे की सिरसा जिले का गावं गुसाईंयाना एक धर्मिक गावं हैं और यहां के लोग अपनी आस्था से सब मानते हैं, यहां केवल ये अखाड़ा ही नही दादा गुसाईं जी का एक प्राचीन मन्दिर भी हैं जो की इस गावं के कुल देवता के रूप में पूजे जाते हैं. और इन्ही के नाम पर ही इस गावं का नाम पड़ा हुआ हैं.

रिपोर्ट मुकेश गुसाईंना

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