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IAS Officer: कौन थे देश के पहले आईएएस ऑफिसर,जानिए उनका जीवन परिचय,उनके बारे में अनोखी बाते

Sandeep Beni
6 Aug 2022 2:43 AM GMT
IAS Officer: कौन थे देश के पहले आईएएस ऑफिसर,जानिए उनका जीवन परिचय,उनके बारे में अनोखी बाते
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IAS Officer: कौन थे देश के पहले आईएएस ऑफिसर,जानिए उनका जीवन परिचय,उनके बारे में अनोखी बाते

संघ लोक सेवा (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा को सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है और हर साल हजारों छात्र इसके लिए उपस्थित होते हैं लेकिन कुछ ही सफल होते हैं। इस परीक्षा के माध्यम से देश में IAS, IPS, IFS और IRS का चयन किया जाता है।

आईएएस रैंक टॉप रैंकर्स को दी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपीएससी परीक्षा कब शुरू हुई थी और भारत में पहला आईएएस अधिकारी (भारत का पहला आईएएस अधिकारी) कौन था?देश की ब्यूरोक्रेसी में भारतीय प्रशासनिक सेवा विभाग सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। इसमें उम्मीदवार विभिन्न मंत्रालय और विभाग में सचिव स्तरीय पद प्राप्त करते हैं

तो वहीं जिलास्तर पर जिलाधिकारी और विभिन्न प्राधिकरणों में आयुक्त पद पर काबिज होते हैं। यही कारण है कि प्रत्यके वर्ष लाखों युवा संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा यानी सीएसई में अपनी किस्मत आजमाते हैं।

हालांकि, सभी को सफलता नसीब नहीं हो पाती है। लेकिन कुछ होनहार ऐसे भी होते हैं, जो अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को क्लीयर कर लेते हैं। ऐसी ही एक होनहार हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस अधिकारी गरिमा अग्रवाल। मध्यप्रदेश के खरगोन की 29 वर्षीय गरिमा ने यूपीएससी के अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस की रैंक पाकर सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और था।

उन्होंने फिर से तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में आईएएस बनने का अपना ख्वाब पूरा किया। आइए जानते हैं आईएएस गरिमा की सफलता की कहानी … शोहरत, रूतबा और दबदबा सब कुछ है। लेकिन पहली बात तो यह कि सिविल सेवा परीक्षा को क्लीयर कर पाना सबके बस की बात नहीं है। दूसरा आपने क्लीयर भी कर लिया तो अच्छी रैंक पाकर आईएएस बनना बड़ा मुश्किल काम है।

हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान गरिमा ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कई अहम टिप्स दिए हैं। गरिमा अग्रवाल अभी तेलंगाना में प्रशिक्षण के लिए सहायक जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं। यूपीएसपी की सिविल सेवा परीक्षा देने के पहले गरिमा आईआईटी हैदराबाद से ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। गरिमा ने दिल्ली नॉलेज ट्रेक को दिए एक साक्षात्कार में अपने आईआईटी से लेकर आईपीएस और फिर आईएएस बनने के सफर की कहानी साझा की।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, भारत में सिविल सेवा परीक्षा 1854 में अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई थी। सिविल सेवा परीक्षा लॉर्ड मैकाले की संसद की चयन समिति की रिपोर्ट के बाद शुरू की गई थी, जबकि पहले सिविल सेवकों ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों द्वारा चुने गए और फिर प्रशिक्षण के लिए लंदन के हैलीबरी कॉलेज भेजे गए और फिर उन्हें भारत में तैनात किया गया।

भारतीयों के लिए कठिन थी परीक्षा

1854 में सिविल सेवा आयोग की स्थापना के बाद, पहली बार परीक्षा 1855 में लंदन में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 23 वर्ष है। उस समय भारतीयों के लिए परीक्षा बहुत कठिन थी और एक सिविल सेवक के रूप में उनका चयन बहुत कठिन था। देश के पहले IAS अधिकारी कौन थे?

सत्येंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और एक आईएएस अधिकारी बन गए। सत्येंद्रनाथ टैगोर रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे और आधिकारिक तौर पर भारत के पहले आईएएस अधिकारी थे।

इंग्लैंड में रहकर तैयार हुए सत्येंद्रनाथ टैगोर

सत्येंद्रनाथ टैगोर 1862 में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए इंग्लैंड गए और केवल एक वर्ष की तैयारी के बाद, उन्हें 1863 में सिविल सेवा के लिए चुना गया। फिर उन्होंने एक वर्ष के लिए इंग्लैंड में अपना प्रशिक्षण पूरा किया और भारत लौट आए। 1864 में। भारत लौटने पर, सत्येंद्रनाथ टैगोर को बॉम्बे प्रेसीडेंसी में तैनात किया गया था और कुछ महीनों के बाद अहमदाबाद शहर में तैनात किया गया था।


महज 21 साल की उम्र में बन गए थे आईएएस अधिकारी

सत्येंद्रनाथ टैगोर का जन्म 1 जून, 1842 को कलकत्ता में हुआ था और जब वे आईएएस अधिकारी बने तो केवल 21 वर्ष के थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कलकत्ता के एक हिंदू स्कूल में पूरी की। वह 1857 में कलकत्ता विश्वविद्यालय की परीक्षा में बैठने वाले पहले छात्रों में से एक थे।

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