ट्रेंडिंग

रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी खबर: अब ट्रेनें नहीं होंगी लेट, ISRO ने तैयार की ये जबरदस्त तकनीक, जानिए

Sandeep Gusaiana
24 Sep 2022 3:36 AM GMT
रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी खबर: अब ट्रेनें नहीं होंगी लेट, ISRO ने तैयार की ये जबरदस्त तकनीक, जानिए
x
अपनी लेटलतीफी के लिए चर्चा में रही भारतीय रेलवे (Indian Railways) धीरे-धीरे बड़े सुधार करने में लगा है. अब उसने अपना ध्यान ट्रेनों की टाइमिंग सुधारने पर लगाया है.

Real Time Train Information System in Indian Railways: अपनी लेटलतीफी के लिए चर्चा में रही भारतीय रेलवे (Indian Railways) धीरे-धीरे बड़े सुधार करने में लगा है. अब उसने अपना ध्यान ट्रेनों की टाइमिंग सुधारने पर लगाया है. रेलवे की पहल कामयाब हुई तो आने वाले वक्त में देश में कोई भी ट्रेन लेट नहीं चलेगी और उसकी रियल टाइम लोकेशन यात्रियों को मिलती रहा करेगी.

असल में भारतीय रेलवे ने इसरो की मदद से एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिसकी मदद से देश में चल रही प्रत्येक ट्रेन पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी और इसकी जानकारी रेलवे के साथ यात्रियों को भी रहेगी.

2700 ट्रेनों में लगा दी गई आधुनिक तकनीक

रेलवे (Indian Railways) के मुताबिक इस आधुनिक तकनीक के तहत रेल के 2700 इंजनों में रियल टाइम ट्रेन इंफॉर्मेशन सिस्टम (RTIS) उपकरण लगाए गए हैं. यह उपकरण प्रत्येक 30 सेकंड के अंतराल पर अपडेट देता रहेगा. इससे ट्रेनों में ऑटोमेटिक चाटिर्ंग और यात्रियों को नवीनतम स्थिति की जानकारी मिल सकेगी. वर्तमान में लगभग 6500 रेल के इंजनों से जीपीएस लगे हैं, जिसकी फीड सीधे कंट्रोल ऑफिस एप्लीकेशन को भेजी जाती है. इसके चलते सिर्फ रेलवे के अधिकारी ही ट्रेनों की लोकेशन चेक कर पाते हैं, बाकी आम यात्रियों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती.

ट्रेन के हर मूवमेंट की मिलेगी जानकारी

इस कमी को दूर करने के लिए इसरो के सहयोग से रियल टाइम ट्रेन इंफॉर्मेशन सिस्टम (RTIS) उपकरण को विकसित किया गया है. इससे ट्रेनों के आगमन, प्रस्थान और किसी स्टेशन से पास होने की रियल टाइम जानकारी अपने आप रेलवे सिस्टम और यात्रियों को मिल जाया करेगी.

रेलवे के साथ यात्री भी कर सकेंगे चेक

रेल मंत्रालय के मुताबिक आरटीआईएस (RTIS) 30 सेकंड के अंतराल पर अपडेट प्रदान करता है. इसके जरिए अब ट्रेनों की स्पीड और स्थान के बारे में बारीक नजर रखी जा सकेगी. मंत्रालय का कहना है कि 2700 इंजनों में आरटीआईएस उपकरण लगा दिए गए हैं. वहीं दूसरे चरण में इसरो के सैटकॉम हब का इस्तेमाल करके 6000 और इंजनों को इस योजना में शामिल किया जाएगा.

Next Story